World Water Day 2025: जल मानव की सबसे मूलभूत आवश्यकता है। व्यक्ति भोजन के बिना कुछ दिन तक जीवित रह सकता है, लेकिन जल के बिना एक दिन भी जीवित रहना मुश्किल है। हमारे शरीर का लगभग दो-तिहाई हिस्सा जल है, और यह न केवल मानव के लिए, बल्कि सभी जीव-जंतुओं, पशु-पक्षियों और पेड़-पौधों के लिए आवश्यक है। जल के महत्व को देखते हुए, मानव जीवन का प्रारंभ नदियों के किनारे के मैदानी क्षेत्रों में हुआ होगा, और सभ्यताएं भी नदियों के आसपास विकसित हुईं।
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जल की उपलब्धता
भूमंडल का 70 प्रतिशत भाग जल से ढका हुआ है, लेकिन इसका केवल 1 प्रतिशत जल ही पीने योग्य है। भूमंडल का 97 प्रतिशत जल समुद्र में है, जो खारा है। केवल 2 प्रतिशत जल ग्लेशियरों और ध्रुवों पर बर्फ के रूप में मिलता है। एक व्यक्ति को प्रतिदिन लगभग 5 लीटर पीने के लिए और अन्य कार्यों के लिए लगभग 90 लीटर जल की आवश्यकता होती है।
जल का दुरुपयोग
हमारी नदियां शुद्ध पेयजल का बड़ा स्रोत थीं, लेकिन आधुनिकता की दौड़ में इन पर बांध बनाकर जल विद्युत बनाई जा रही है और सिंचाई के लिए उपयोग किया जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप नदियों में पेयजल की मात्रा कम हो गई है।
पर्यावरण प्रदूषण का प्रभाव
पर्यावरण प्रदूषण ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है। महानगरों और नगरों की सीवर लाइनों का गंदा पानी नदियों में बहाया जाता है, जिससे उनका पानी पीने योग्य नहीं रह गया है। उदाहरण के लिए, गंगा नदी जिसका जल पुराणों में अमृत कहा गया था, अब बढ़ते प्रदूषण के कारण जहरीला होता जा रहा है।
जल संकट
भारत में केवल 35 प्रतिशत लोगों के घरों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध है। देश की 42.2 प्रतिशत आबादी को पानी लेने के लिए आधा किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, अशुद्ध जल पीने से 21 प्रतिशत बीमारियां होती हैं।
जल बचाने की आवश्यकता
प्रतिदिन करोड़ों लीटर पानी रेलवे यार्डों और कार रिपेयर सेंटर्स में व्यर्थ होता है। वर्षा जल संचयन एक प्रभावी उपाय हो सकता है। हमें रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाना चाहिए ताकि वर्षा का जल संचित किया जा सके।
जल कुदरत की अनमोल नियामत है; इसे व्यर्थ में बर्बाद नहीं करना चाहिए। यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम इसे भविष्य की पीढ़ी के लिए सुरक्षित रखें।
FAQ
- World Water Day कब मनाया जाता है?
World Water Day हर साल 22 मार्च को मनाया जाता है। - World Water Day 2025 का विषय क्या है?
इस साल का विषय “Glacier Preservation” है, जो ग्लेशियरों के संरक्षण की आवश्यकता को उजागर करता है। - भारत में जल संकट की स्थिति क्या है?
भारत में केवल 35 प्रतिशत लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध है, और कई लोग पानी लाने के लिए लंबी दूरी तय करने को मजबूर हैं।