राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस: गुजरात सबसे आगे, जानें क्यों!

राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस 2025: गुजरात का उत्कृष्ट प्रदर्शन

हर साल 16 मार्च को राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस मनाया जाता है, जो 1995 में भारत में पल्स पोलियो टीकाकरण कार्यक्रम की शुरुआत की याद दिलाता है। यह दिन टीकाकरण के महत्व को बढ़ावा देने और स्वास्थ्य कर्मियों के योगदान को सम्मानित करने के लिए समर्पित है। इस वर्ष, गुजरात ने टीकाकरण कवरेज में शानदार प्रदर्शन करते हुए SDG-3 इंडेक्स में 95.95% कवरेज हासिल किया है, जो राष्ट्रीय औसत (93.23%) से अधिक है।

गुजरात की उपलब्धियां:

  1. मिशन इंद्रधनुष के तहत प्रदर्शन:
    • अब तक 9,95,395 बच्चों और 2,25,960 गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण किया गया।
    • “खिलखिलाहट अभियान” के तहत जनवरी 2025 में 25,736 बच्चों को BCG, OPV, Penta, IPV, Rota, PCV, MR और DPT जैसे महत्वपूर्ण टीके लगाए गए।
  2. पोलियो के खिलाफ जीत:
    • 2007 से 2024 तक गुजरात में एक भी पोलियो मामला दर्ज नहीं हुआ।
    • 2024 में नेशनल इम्यूनाइजेशन डे (NID) पर 82.49 लाख बच्चों को पोलियो ड्रॉप दी गई।
  3. विशेष पहलें:
    • धन्वंतरि रथ, टीका एक्सप्रेस, और मोबाइल ममता दिवस जैसी योजनाओं ने दूरस्थ क्षेत्रों में टीकाकरण कवरेज बढ़ाने में मदद की।
    • स्कूलों और बालवाटिकाओं में 18 लाख से अधिक बच्चों को टिटनेस-डिप्थेरिया का टीका दिया गया।

गुजरात सरकार की रणनीतियां:

  • नवजात शिशुओं और गर्भवती महिलाओं तक टीकाकरण सेवाएं पहुंचाने के लिए विशेष अभियान चलाए गए।
  • वडोदरा, सूरत और अहमदाबाद जैसे क्षेत्रों को लक्षित कर व्यापक टीकाकरण कवरेज सुनिश्चित किया गया।

राष्ट्रीय महत्व:

राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस का उद्देश्य:

  • वैक्सीन-रोकथाम योग्य बीमारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना।
  • समाज के वंचित वर्गों तक टीकाकरण सेवाएं पहुंचाना।
  • मिथकों और भ्रांतियों को दूर करना।
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सामान्य प्रश्न:

  1. राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस क्यों मनाया जाता है?
    • यह दिन पल्स पोलियो कार्यक्रम की सफलता और वैक्सीन-रोकथाम योग्य बीमारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है।
  2. गुजरात ने SDG-3 इंडेक्स में कैसे उत्कृष्ट प्रदर्शन किया?
    • मिशन इंद्रधनुष और अन्य योजनाओं के तहत 95.95% टीकाकरण कवरेज हासिल कर गुजरात ने राष्ट्रीय औसत (93.23%) को पीछे छोड़ दिया।
  3. पोलियो उन्मूलन में गुजरात का योगदान क्या है?
    • 2007 से अब तक गुजरात में पोलियो का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है। राज्य ने नियमित पोलियो अभियान चलाकर यह उपलब्धि हासिल की।

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