चंद्रयान 4 और चंद्रयान 5: ISRO के महत्वाकांक्षी मिशन
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने चंद्रमा की खोज को लेकर अपने अगले दो बड़े मिशन, चंद्रयान 4 और चंद्रयान 5, की घोषणा की है। इन मिशनों का उद्देश्य चंद्रमा की सतह का गहन अध्ययन और भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए नई तकनीकों का विकास करना है।
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चंद्रयान 4 मिशन
- लॉन्च वर्ष: 2028
- उद्देश्य:
- चंद्रमा की सतह से मिट्टी और चट्टानों के नमूने एकत्र करना और उन्हें पृथ्वी पर वापस लाना।
- यह मिशन भारत को अमेरिका, रूस, और चीन के बाद चंद्र नमूने वापस लाने वाला चौथा देश बना सकता है।
- तकनीकी विशेषताएं:
- पांच मॉड्यूल: लैंडर, एसेंडर, ट्रांसफर मॉड्यूल, री-एंट्री मॉड्यूल, और प्रपल्शन मॉड्यूल।
- दो लॉन्च: LVM-3 और PSLV रॉकेट का उपयोग।
- चंद्रमा पर सैंपल कलेक्शन के लिए रोबोटिक आर्म का उपयोग।
- बजट: ₹2104 करोड़।
- महत्व:
- चंद्रमा पर पानी और संसाधनों की खोज में मदद करेगा।
- भविष्य के मानवयुक्त मिशनों के लिए तकनीकी परीक्षण।
चंद्रयान 5 मिशन
- लॉन्च वर्ष: चंद्रयान 4 के बाद (संभावित 2029-2030)।
- सहयोगी देश: जापान (JAXA)।
- उद्देश्य:
- चंद्रमा के स्थायी छायादार क्षेत्रों (पोलर क्षेत्र) का अध्ययन।
- पानी की बर्फ और अन्य संसाधनों की खोज।
- तकनीकी विशेषताएं:
- भारतीय लैंडर और जापानी रोवर का उपयोग।
- रोवर का वजन: 250 किलोग्राम (चंद्रयान 3 के प्रज्ञान रोवर से बड़ा)।
- महत्व:
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देगा।
- चंद्रमा पर दीर्घकालिक अनुसंधान और मानव बस्तियों की संभावनाओं को समझने में मदद करेगा।
ISRO का दीर्घकालिक विजन
- इन मिशनों से प्राप्त डेटा भविष्य में भारत के मानवयुक्त अंतरिक्ष अभियानों, जैसे गगनयान और संभावित भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन, के लिए आधार तैयार करेगा।
- ISRO का लक्ष्य 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करना और 2040 तक चंद्रमा पर मानव भेजना है।
FAQs
- चंद्रयान 4 का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- इसका उद्देश्य चंद्रमा से मिट्टी और चट्टानों के नमूने एकत्र कर उन्हें पृथ्वी पर वापस लाना है।
- चंद्रयान 5 में जापान की क्या भूमिका होगी?
- जापान इस मिशन में रोवर प्रदान करेगा, जबकि ISRO लैंडर विकसित करेगा। यह मिशन चंद्रमा के पोलर क्षेत्रों का अध्ययन करेगा।
- चंद्रयान 4 और चंद्रयान 5 में क्या अंतर है?
- चंद्रयान 4 का उद्देश्य नमूने वापस लाना है, जबकि चंद्रयान 5 का उद्देश्य स्थायी छायादार क्षेत्रों की खोज करना है।