भारत सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए 22,919 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है। यह योजना देश में निष्क्रिय इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स के उत्पादन को प्रोत्साहित करेगी, जिससे भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य है। केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में इस योजना को स्वीकृति दी गई है, जिसका उद्देश्य बड़े निवेश को आकर्षित करना और रोजगार के अवसर पैदा करना है।
योजना का उद्देश्य:
- बड़े निवेश को आकर्षित करना: यह योजना इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम में वैश्विक और घरेलू निवेश को बढ़ावा देगी।
- रोजगार सृजन: इस योजना से 91,600 लोगों के लिए प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे और लगभग 59,350 करोड़ रुपये का निवेश आने की उम्मीद है।
- ग्लोबल वैल्यू चेन (GVC) में एकीकरण: भारतीय कंपनियों को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं के साथ एकीकृत करके घरेलू मूल्यवर्धन (DVA) में वृद्धि करने की योजना है।
उत्पादन का अनुमान:
इस योजना के तहत अगले छह वर्षों में 4.56 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन होने की उम्मीद है। इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों का घरेलू उत्पादन वित्त वर्ष 2014-15 में 1.90 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2023-24 में 9.52 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो सालाना 17 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्शाता है।
प्रमुख सेक्टर्स:
यह योजना दूरसंचार, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, चिकित्सा उपकरण और पावर सेक्टर जैसे कई क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करेगी। इसमें डिस्प्ले मॉड्यूल, कैमरा मॉड्यूल, मल्टी-लेयर प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB), लिथियम-आयन बैटरी और आईटी हार्डवेयर उत्पादों से जुड़े कंपोनेंट्स शामिल हैं।
FAQs:
- इस योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- इस योजना का मुख्य उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भरता लाना और बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करना है।
- इस योजना से कितने लोगों को रोजगार मिलेगा?
- इस योजना से लगभग 91,600 लोगों के लिए प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे।
- इस योजना का कार्यान्वयन कब तक होगा?
- यह योजना अगले छह वर्षों में पूरी होगी।