हिमाचल प्रदेश के शिमला में अब एशिया का सबसे लंबा रोपवे बनने जा रहा है, जिसका उद्देश्य पर्यटन को बढ़ावा देना और ट्रैफिक की समस्या को कम करना है। यह रोपवे 13.79 किलोमीटर लंबा होगा और इसकी लागत 1,734.40 करोड़ रुपये है। परियोजना का कार्य सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत रोपवे और रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम डेवलपमेंट कॉरपोरेशन द्वारा शुरू किया गया है।
रोपवे की विशेषताएं
- रूट: यह रोपवे मां तारा देवी और संजौली के बीच चलेगा, जो लगभग 60 किलोमीटर की दूरी को कवर करेगा। वर्तमान में इस दूरी को तय करने में 3 से 4 घंटे लगते हैं, लेकिन रोपवे के माध्यम से इसे मात्र 90 मिनट में पूरा किया जा सकेगा।
- स्टेशन: इस रोपवे के लिए शिमला और आस-पास के क्षेत्रों में 15 प्रमुख स्टेशन बनाए जाएंगे।
- क्षमता: हर घंटे दोनों दिशाओं से लगभग 2,000 लोग यात्रा कर सकेंगे, और इसमें 660 केबिन होंगे। हर केबिन की क्षमता 8-10 यात्रियों की होगी।
- सौर ऊर्जा: पर्यावरण अनुकूल सौर पैनल हर केबिन पर लगाए जाएंगे, साथ ही बोर्डिंग प्वाइंट पर 90 चार्जिंग स्टेशन भी स्थापित किए जाएंगे।
प्रमुख बोर्डिंग स्टेशन
- मां तारा देवी
- न्यायालय परिसर (चक्कर)
- टुटीकंडी पार्किंग क्षेत्र
- आईएसबीटी
- सुरंग संख्या 103
- रेलवे स्टेशन
- विजय सुरंग
- पुराना बस स्टैंड
- लिफ्ट के पास बोर्डिंग एरिया स्टेशन
- लक्कड़ बाजार क्षेत्र
- आईजीएमसी अस्पताल
- नवबहार
- सचिवालय
यह परियोजना न केवल शिमला में ट्रैफिक जाम की समस्या को हल करेगी, बल्कि बर्फबारी वाले मौसम में आवागमन को भी सुगम बनाएगी।
FAQs
- रोपवे का निर्माण कब शुरू होगा?
- रोपवे का निर्माण कार्य पहले ही शुरू हो चुका है।
- यह रोपवे किस-किस स्थानों को जोड़ेगा?
- यह रोपवे मां तारा देवी से संजौली तक चलेगा और इसके रास्ते में कई प्रमुख स्टेशन होंगे।
- क्या इस रोपवे में सौर ऊर्जा का उपयोग किया जाएगा?
- हाँ, हर केबिन पर सौर पैनल लगाए जाएंगे ताकि यह पर्यावरण के अनुकूल हो सके।
share