केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (PMBJP) के तहत 15,000 से अधिक जन औषधि केंद्र (JAK) स्थापित करने का लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है। यह लक्ष्य मार्च 2025 की समय सीमा से दो महीने पहले पूरा हुआ, और 28 फरवरी तक देशभर में कुल 15,057 जन औषधि केंद्र सक्रिय हैं।
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मुख्य जानकारी:
- लक्ष्य: 15,000 जन औषधि केंद्र खोलना।
- समय सीमा: मार्च 2025, लेकिन जनवरी 2025 में लक्ष्य पूरा किया गया।
- भविष्य के लक्ष्य: मार्च 2026 तक 20,000 और मार्च 2027 तक 25,000 जन औषधि केंद्र खोलने की योजना।
दवाओं की उपलब्धता:
इस योजना के तहत 2047 प्रकार की दवाएं और 300 प्रकार के सर्जिकल उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इन उत्पादों की कीमतें सामान्यतः उनके समकक्ष ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 50-80% कम हैं। यह दवाएं हृदय रोग, डाइबिटीज, ऑन्कोलॉजी और अन्य महत्वपूर्ण चिकित्सा क्षेत्रों को कवर करती हैं।
बिक्री में वृद्धि:
वित्तीय वर्ष 2024-25 में 28 फरवरी तक कुल ₹1767.18 करोड़ की दवाएं बेची गईं, जो पिछले वर्ष के ₹1327 करोड़ की बिक्री से 33% अधिक है।
सरकारी प्रयास:
सरकार ने जन औषधि केंद्रों के नेटवर्क को बढ़ाने के लिए विभिन्न कदम उठाए हैं, जैसे कि:
- केंद्रीय गोदामों का निर्माण (गुरुग्राम, बेंगलुरु, चेन्नई, सूरत और गुवाहाटी)।
- 36 वितरकों को दवाओं की आपूर्ति की जिम्मेदारी दी गई है।
लाभार्थियों के लिए अवसर:
सरकार ने उद्यमियों, एनजीओ और ट्रस्टों को जन औषधि केंद्र खोलने के लिए ऑनलाइन आवेदन करने को कहा है। इसके लिए आवेदकों को D. Pharma या B. Pharma की डिग्री होनी चाहिए या उन्हें एक रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट नियुक्त करना होगा।
FAQs:
- जन औषधि केंद्र खोलने के लिए क्या आवश्यकताएँ हैं?
- आवेदकों को D. Pharma या B. Pharma डिग्री होल्डर होना चाहिए या एक रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट नियुक्त करना होगा।
- क्या इस योजना से दवाओं की कीमतें कम होंगी?
- हाँ, इस योजना के तहत दवाएं ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 50-80% कम कीमत पर उपलब्ध कराई जाती हैं।
- जन औषधि केंद्रों से कितने लोग लाभ उठा रहे हैं?
- औसतन रोजाना 10-12 लाख लोग इन केंद्रों से सस्ती दवाएं खरीदते हैं।